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ब्लॉगिंग के बढ़ते आकर्षण पर
आकांक्षा यादव ने जो लिखा
आप भी पढि़ए
ब्लॉगिंग पर लिखे हुए को
आप भी शेयर करिए।
वैसे पत्रिका भी उपलब्ध है पूरी
ज्यादा नहीं है दूरी
www.drishtipat.com
प्रिंट पत्रिका है यह।
जिक्र हो सकता है
आपका भी हुआ हो
न हो तो भी
जिनका जिक्र है
उनसे परिचित हों।
शुक्रवार, १८ दिसम्बर २००९
ब्लॉगिंग का बढ़ता आकर्षण : आकांक्षा यादव (दृष्टिपात नवम्बर 2009 अंक)
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Friday, December 18, 2009
12
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लेबल: दृष्टिपात पर ब्लॉगिंग
शुक्रवार, ११ दिसम्बर २००९
सबरस की सांध्य काव्य गोष्ठी में शामिल हुये अविनाश वाचस्पति
ब्रेक ढीला छोड़ रहा हूं। पढ़ें पर आगे से हट जायें ....
टिप्पणी देने के लिए अवश्य डट जायें :-
मुंबई पहुंच रहा हूं ये जानकर
कवि कुलवंत ने काव्य गोष्ठी में बुलाया। मुझको भी उनका निमंत्रण खूब रास आया। मैंने मुंबई में 5 दिसम्बर 2009 की शाम को मुंबई के सबरंग समूह के कवियों के नाम कर दिया।
6 बजे से शुरू हुई काव्य गोष्ठी निरंतर साढ़े आठ बजे तक अबाध रूप से चली और मंत्र-मुग्ध कर गई। एक भी श्रोता धराशायी नहीं हुआ कारण सभी कविता कहने को लालायित थे इसलिए अंत तक मजबूती से डटे रहे। 
सबने खूब कवितायें सुनाईं, एक पर कोई नहीं रूका किसी ने दो तो किसी ने चार सुनाईं। मौका किसी ने चूकने न दिया। तो मैं भी कहां चूकने वाला था मैंने कविता सुनाई 'शहर में हैं सभी अंधे'और एक व्यंग्य भी पढ़ दिया- शीर्षक 'जब चूहे बोलेंगे खूब राज खोलेंगे'(चाहें तो शीर्षक पर क्लिक करके आप भी पढ़ सकते हैं, हंस सकते हैं, टिप्पणी कर सकते हैं) व्यंग्य होता है व्यंग्य ही, पर देखा कि व्यंग्य सबको हंसा रहा था। सबके चेहरे पंक्ति दर पंक्ति खिल रहे थे। कल्पना के गोते में सभी हिलमिल रहे थे। खिलखिला रहे थे।
मस्ती रही भरपूर। शाम कविता की लुभा गई। एक नहीं, दो नहीं, कई नये दोस्त मुंबई में बना गई।
गोवा के छिलके वाले काजूओं ने भी कविताओं का खूब आनंद लिया। इन छिलके वाले काजुओं की उपस्थिति मुंबई ब्लॉगर मिलन समारोह में भी दर्ज की गई है। देखा गया कि सबरंग की इस काव्य-गोष्ठी में ब्लॉगर कम पर कविता कहने वाले अधिक थे। जो ब्लॉगर रहे वहां पर वे भी मुंबई ब्लॉगर मिलन में नहीं आये।
निष्कर्ष यही रहा कि कविता सुनकर इतने मस्त या सुस्त हो गये होंगे कि उनकी नेशनल पार्क में जंतुओं के बीच पहुंचने की हिम्मत ही बाकी न रही होगी। तो क्या वे ब्लॉगर सभी डरपोक रहे, जो कविता सम्मेलन में आये थे। ऐसा भी नहीं था क्योंकि मैं तो वहां बेखौफ शामिल हुआ
परन्तु कवि कुलवंत तो सिंह हैं फिर भी ब्लॉगर मिलन समारोह में आने से क्यों डरे, उनका डरना पी. एम. को तनिक न भाया और अगली सुबह ब्लॉगर मिलन समारोह का ताजा हाल जानने के लिए उनका फोन आया। हमने सारा हाल ऐसा ही कह सुनाया। पर उन्होंने कवि के न आने का कारण महंगाई को बताया। अब आप हमें साफ-साफ बतलायें कि कवि कुलवंत एक ब्लॉगर होते हुए भी मुंबई ब्लॉगर मिलन समारोह में क्यों नहीं शामिल हुए, जबकि देश-विदेश के सभी नामचीन ब्लॉगर उन्हें जानते हैं और वे भी सभी को अच्छी तरह पहचानते हैं।
हम तो मुंबई में सबसे निवेदन करते रहे कि एक ब्लॉगर पांच-पांच हिन्दी ब्लॉगर और बनाये और उन सबके कंप्यूटर को हिन्दी-स्वरूप में ढलवाये।
शनिवार 5 दिसम्बर को मुंबई में कविता और
6 दिसम्बर को मुंबई ब्लॉगर मिलन का मेला।
अब इसके बाद जो ब्रेक में लगा रहा हूं। उसके बाद आप पढ़ेंगे ब्लॉगर मिलन के रोचक और सोचक किस्से। आप चित्रों में नजर आ रहे यानी पहचाने जा रहे उपस्थितों के नाम भी बतलायें पर मेरे सिवाय। 
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Friday, December 11, 2009
13
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मंगलवार, १ दिसम्बर २००९
मुंबईवासियों और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह के प्रतिभागियों के लिए विशेष (अविनाश वाचस्पति)

आप इन्हें जानते होंगे
जानता तो मैं भी हूं
मुझे तो आप जानते ही हैं
मेरा नाम बतलाने की नहीं है जरूरत
बस इन्हें पहचानिए
नहीं पहचान पायेंगे तो
हम करेंगे आपकी मदद जरूर
वैसे उनके कार्य करते हुए
एक चित्र लगाया है
जो इनकी पहचान में
मदद करेगा आपकी सबकी
जो जानता चाहता है
उन सबकी।
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Tuesday, December 01, 2009
2
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लेबल: पहचान कौन
सोमवार, ३० नवम्बर २००९
मुंबई में आया ब्लॉगरों का दोस्त (अविनाश वाचस्पति)
आप सलाम करो या न करो जी
पर अविनाश का सबको सलाम।
कहा जाता है कि आजकल किसी के पास किसी के लिए टाइम नहीं है। अपने और अपने परिवार के सिवाय। कोई किसी पर विश्वास नहीं करता है अपने सिवाय। पर पहले सभी के पास सभी के लिए समय भी था और विश्वास की भी कोई कमी नहीं रही। ब्लॉग जगत का आना बिल्कुल पुराने समृद्ध मूल्यों और परंपराओं की वापसी ही पूरा नहीं पढ़ा है तो यहां पर क्लिक कीजिए पढि़ए और टिप्पणी दीजिए
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Monday, November 30, 2009
0
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शनिवार, २८ नवम्बर २००९
इनसे मिलिए और नाम बतलाइए
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Saturday, November 28, 2009
8
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लेबल: गोवा फिल्म समारोह
शुक्रवार, २७ नवम्बर २००९
महंगाई मार गई छपास में पढि़ए (अविनाश वाचस्पति)
मेरे सुबह सैरिया मित्र पवन चंदन आज एक लंबे अरसे बाद मिले थे। इसलिए मूड में थे आगे पढ़ने और टिप्पणी देने के लिए क्लिक कीजिए
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Friday, November 27, 2009
लेबल: महंगाई मार गई
बुधवार, १८ नवम्बर २००९
साड्डे नाल रहोगे ते ऐश करोगे (अविनाश वाचस्पति)
प्रस्तुतकर्ता
अविनाश वाचस्पति
पर
Wednesday, November 18, 2009
3
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